भाग्य

  • कर्मफल उसी के लिए है जो इससे भागना चाहता है। तुम इसका विरोध करो तो तुम कर्मफल, प्रारब्ध से मुक्त हो जाओगे।”

 

  • अभी को साधो, कल अपने आप ठीक हो जाएगा।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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