भविष्य

  • जहाँ कहीं भी तुम्हारे लिए भविष्य महत्वपूर्ण हुआ, वहाँ समझ लो कि तुम अपने साथ कोई धोखा-धड़ी कर ही रहे हो।”भविष्य का सपना, अगले जन्म का ही विचार है।”

 

  • जिसके लिए भविष्य जीवित है, वो कर्मफ़ल से मुक्त नहीं हो सकता।”

 

  • हम सोचते हैं कि हम हैं, पथ है और लक्ष्य है। तो लक्ष्य हम से आगे ही होगा।”

 

  • अभी को साधो, कल अपने आप ठीक हो जाएगा।”
  • “सारी प्रतीक्षा व्यर्थ है, और सारी प्रतीक्षा वर्तमान से भागने का उपाय है। प्रतीक्षा का अर्थ होता है कि – भविष्य में कुछ ख़ास हो जाना है।”
  • “जो होना है, अभी होना है। भविष्य तुम्हें कुछ नहीं दे सकता।  वर्त्तमान के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं। 
  • “जहाँ कहीं भी भविष्य का इंतज़ार होगा, वर्त्तमान कड़वा हो जाएगा।”
  • “जो भी कोई भविष्य के इंतज़ार में जी रहा है, वो अपने वर्त्तमान को कड़वा बना के रहेगा। और जो कोई वर्त्तमान में ही जी रहा है, उसके लिए वर्त्तमान ही मीठा है। उसे भविष्य चाहिए नहीं। उसके वर्त्तमान और भविष्य, दोनों मीठे हो जायेंगे।”

  • “भविष्य और कुछ नहीं है, तुम्हारा मन जिस भविष्य की कामना करता रहता है, वह भविष्य तुम्हारे अतीत का पुनः चक्रण है।”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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