पूजा

  • जो उसके जैसा है, उसे वही भाता है। जो सामाजिक मंदिर की पूजा करेगा, लगातार खौफ में जिएगा ।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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