पहचान

  • डिब्बा हीरे को कब पहचान पाया है? डिब्बा में इतनी ही समझ होती तो वो डिब्बा थोड़े ही रहता।”

 

  • एक योगी तो संसारी को पहचान जाता है, पर एक संसारी योगी को नहीं पहचान सकता | तुम्हारे सामने से कृष्ण निकल जाएं, तुम पहचान नहीं पाओगे |” 

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    उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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