दुविधा

  • जो सत्य से दूरी बना बैठे हैं, उनकी सज़ा है वो भय। वो संशय में ही जियेंगे ।”

 

  • संदेह का उठना मतलब, ‘मैं नहीं जानता’।”

 

  • तुम्हें पक्का ही होता कि प्रेम है, तो संदेह क्यों होता?”

 

  • “कुछ और गड़बड़ हो या न हो, शक का होना ही अपने आप में एक गड़बड़ है।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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