जन्म

  • मनुष्य जन्म की सबसे बड़ी त्रासदी: हारे हुए को जिताने की कोशिश।”

 

  • बिंदु की लीला से ‘अहं’ वृत्ति का जन्म होता है। तो अहं वृत्ति एक अपूर्णता के साथ पैदा होती है। वही अपूर्ण, पूर्ण होने के लिये साथी चाहता है, विषय चाहता है।”

 

  • बेहोशी ही बेहोशी को जन्म देती है।”

 

  • समय में कुछ भी लौटकर नहीं आता। अभी जो है, वो बदलेगा। इस बदलाव को समझने में ही ‘उसकी’ प्राप्ति है जो बदलता नहीं। इस बदलाव को जिसने जान लिया, उसका जन्म सार्थक हुआ।”

 

  • भविष्य का सपना, अगले जन्म का ही विचार है।”

 

  • जन्म इसलिए होता है ताकि जीवन को जान सकें। जन्म अवसर है सही मायने में जीवित होने का।”

 

  • तुम साफ़-सुथरे होते तो पैदा ही क्यों होते? तुम पैदा ही इसलिए हुए क्योंकि तुम्हें कुछ भोगना था। अन्यथा पैदा होने की कोई इच्छा ही होती।”

 

  • उन वृत्तियों से जो पैदा होता है वो नाती है, मतलब विचार और संसार।”

 

  • गुरु तुम्हें कुछ देता नहीं है, वो तुम्हें पैदा करता है।”

 

  • पैदा हो जाओ।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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