काम

  • विज्ञापन से बचो। विज्ञापन मनोरंजन नहीं, तुम्हारे मन पर आक्रमण हैं। विज्ञापन बुद्धि के साथ धोखा और कामना के लिए न्यौता हैं।”

 

  • जो बीमार है वही स्वस्थ होने की इच्छा करता है। जैसे-जैसे आप स्वस्थ होते जाते हैं, वैसे-वैसे आपकी ये इच्छा क्षीण होती जाती है। स्वस्थ इंसान स्वास्थ्य की कामना नहीं करता।”

 

  • ”काम दूर खड़ा हो, तो शैतानकाम दिल में बसा हो, तो भगवान

    बन्दे की पीठ पर चढ़ा हो, तो शैतान
    बन्दे के दिल में बसा हो, तो भगवान”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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