उत्कृष्टता

  • कभी ऐसा हुआ है कि आप विचारों से, संसार से अनछुए रह जाओ? जो संसार में उलझ गया वो नीच| जो अनछुआ रह गया वो उत्तम |”

 

  • किसी के भी जीवन में शरीर और विचारों से प्रवेश करना नीचता है| किसी के जीवन में आत्मा के राजपथ से प्रवेश करना उत्तम है |”

 

  • “विनम्रता का अर्थ होता है: सर्वप्रथम अपनी ओर देखना।”


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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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