इच्छा

  • जो भयानक है वो कुछ छीन नहीं सकता,जो आकर्षक है वो कुछ दे नहीं सकता।”

 

  • मोह त्यागो, और त्याग को भी त्यागो।”

 

  • आत्मबल इच्छाशक्ति नहीं है। इच्छा नहीं होती आत्मबल में। जब तक इच्छा का ज़ोर लगाओगे, तब तक आत्मबल की असीम ताक़त को नहीं पाओगे। इच्छाशक्ति है मन की अकड़, आत्मबल है मन का समर्पण। जब व्यक्तिगत इच्छा को ऊर्जा देना छोड़ते हो तब समष्टि का बल तुम्हारे माध्यम से प्रवाहित होता है- वह आत्मबल है। आत्मबल इच्छाशक्ति नहीं है। इच्छा नहीं होती आत्मबल में। जब तक इच्छा का ज़ोर लगाओगे, तब तक आत्मबल की असीम ताक़त को नहीं पाओगे। इच्छाशक्ति है मन की अकड़, आत्मबल है मन का समर्पण। जब व्यक्तिगत इच्छा को ऊर्जा देना छोड़ते हो तब समष्टि का बल तुम्हारे माध्यम से प्रवाहित होता है-  वह आत्मबल है।”

 

  • जो बीमार है वही स्वस्थ होने की इच्छा करता है। जैसे-जैसे आप स्वस्थ होते जाते हैं, वैसे-वैसे आपकी ये इच्छा क्षीण होती जाती है। स्वस्थ इंसान स्वास्थ्य की कामना नहीं करता।”

 

  • तुम साफ़-सुथरे होते तो पैदा ही क्यों होते? तुम पैदा ही इसलिए हुए क्योंकि तुम्हें कुछ भोगना था। अन्यथा पैदा होने की कोई इच्छा ही होती।”

 

  • कुछ पाने की हर इच्छा प्रेम और मुक्ति की है। पर तुम्हें पकड़ा दिए गए हैं धारणाएं और बंधन।”

 

  • बदलने की इच्छा ही विक्षिप्तता है। जो है उसके प्रवाह से छेड़खानी की कोशिश ही दुःख है।”

 

  • पाना तो तुम सत्य को ही चाहते हो पर संसार तुम्हें गलत दिशा में मोड़ देता है।”

 

  • बदलने की तुम्हारी इच्छा तुम्हें बदल देगी।”

 

  • “तुम्हारी जो सबसे करीबी इच्छाएँ भी हैं, तुम्हारी जो सबसे आंतरिक इच्छाएँ भी हैं, वो भी तुम्हारी अपनी नहीं हैं। वो भी तुम्हारे भीतर आरोपित की गई हैं, प्रत्यारोपण की गई हैं। जिसे तुम अपना लक्ष्य बोलते हो, वो लक्ष्य भी तुम्हारा नहीं है।”

 

  • डिज़ायरलेस होने का मतलब है, जिसकी हर इच्छा, अस्तित्व की इच्छा है।”

 

  • “तुम्हारी इच्छा, अहंकार की ही इच्छा है।”

 

  • “मन इच्छाओं के अलावे कुछ नहीं है। मन अहंकार के अलावे कुछ नहीं है। मन सिर्फ एक चीज़ चाहता है, खुद को बनाए रखना। इसीलिए वो तुम्हें निरंतर, नित्य, इच्छाओं में रखेगा। इच्छाओं में रहने की वजह से आप भविष्य में होते हो। क्योंकि सारी इच्छाएँ भविष्य के बारे में होती हैं। भविष्य में रहने की वजह से मन वो पा लेता है जो उसे पाना होता है। वो क्या पाना चाहता है? तुम्हें इस क्षण से दूर रखना।”

 

  • “एक होशियार आदमी वो है, जो भविष्य में नहीं जीता, वर्तमान में जीता है। एक होशियार आदमी वो है, जो इच्छा में नहीं जीता, जो वर्तमान में जीता है, जिसको चाहतों से कोई लेना देना नहीं।”

 

  • ““बी योरसेल्फ़” कहने का हक़ सिर्फ उसको है, जो सब प्रभावों से परे हट के, प्रभावों को देखना जानता हो। जिसके मन में जब इच्छाएँ उठें, तो वो उन इच्छाओं में बह न जाए। वो उन इच्छाओं को देख पाए। वो तुरंत समझ पाए, कि इच्छा उठी। और वो समझ पाए कि इच्छा क्यों उठी? और वो उस इच्छा का गुलाम बन के न बैठ जाए।”

 

  • “मन का किधर को भी जाना एक प्रकार कि इच्छा ही है।”

 

  • “तुम्हारी गहरी से गहरी इच्छा है कि सारी इच्छाएँ खत्म हो जाएँ।”

 

  • “तुम कोशिश कर-कर के कोशिश कर रहे हो, कोशिश के पार जाने की।”

 

  • “इच्छाएँ भ्रम हैं। मन सिर्फ इसीलिए दौड़ रहा होता है, क्योंकि जो रिएलिटी है, वास्तविकता है, उसमें नहीं जीना चाहते।”

 

  • “जब बाहर से पूरी होने की आशा मिट जाती है, उसी को कहा जाता हैं कि भीतर से आपूर्ति हो गयी।”

 

  • “अगर पक्का-पक्का चाहने लगोगे कि वही मिल जाए, तो वो मिल जाएगा।लेकिन तुम चाह सकते नहीं जब तक वो न चाहे कि तुम चाहो।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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