आदर्श

  • बड़ी से बड़ी मूर्खता यह है कि हम व्यापारियों को गुरु बना लेते है। इनका स्थान बाज़ार में है, मंदिर में नहीं। इनको आदर्श मत बना लेना। मंदिर बाज़ारू नहीं होता।”

——————————————————

उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

Leave a Reply