अस्तित्व

  • जो अनस्तित्व में जीता है वो अस्तित्व का राजा हो जाता है।”

 

  • सिखाने वाला एक है, माध्यम हज़ार।”

 

  • महत्वपूर्ण है महत्वपूर्ण को याद रखना।”

 

  • निर्लज्ज, बेशर्म जियो। फूलों की तरह, सूरज और चाँद की तरह, नदियों, पहाड़ों और पशु-पक्षियों की तरह। अस्तित्व को कोई शर्म नहीं और परमात्मा को कोई पर्दा नहीं। तुमने ही अपनी होशियारी में अपने को शर्मनाक और शर्मसार बना लिया है। परम निर्विकार, निर्विशेष, निराकार और निरंजन ही नहीं, निर्लज्ज भी है।”

 

  • “तुम्हारे अधिकारों पर अस्तित्व कभी सीमा नहीं लगाता है। इंसान ही इंसान को बाँधने की कोशिश करता है।”

 

  • “अस्तित्व के बड़े अद्भुत तरीके हैं। वहाँ कब क्या होना है, तुम नहीं जान सकते। और जो जब होना है, तभी होगा।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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